
जन्म से लेकर 12 वर्ष की उम्र तक बच्चे का शरीर कई प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। इस उम्र में बच्चे की इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वह कई गंभीर बीमारियों से खुद को सुरक्षित नहीं रख पाता।
आज भी टेटनस, डिप्थीरिया, HPV और काली खांसी (Whooping Cough) जैसी बीमारियां समाज में मौजूद हैं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकती हैं। ऐसे में बच्चों को इन बीमारियों से बचाने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है — समय पर टीकाकरण (Vaccination)।
टीके चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हैं, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं और उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाते हैं। इसलिए हर माता-पिता के लिए बच्चों के टीकाकरण शेड्यूल का पालन करना बेहद जरूरी है।
इस लेख में हम जानेंगे:
- बच्चों के लिए टीके क्यों जरूरी हैं
- बच्चों का अनुशंसित टीकाकरण शेड्यूल
- और समय पर टीकाकरण में माता-पिता की भूमिका
बच्चों के लिए टीके क्यों जरूरी हैं?
टीके बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए बनाए जाते हैं, ताकि उनका शरीर गंभीर बीमारियों से लड़ सके। खासकर शिशुओं में, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अभी विकसित हो रही होती है, ये बीमारियां जानलेवा भी हो सकती हैं।
अगर बच्चों का टीकाकरण नहीं किया जाए, तो खसरा, डिप्थीरिया और पोलियो जैसी संक्रामक बीमारियां, जो कई देशों में लगभग खत्म हो चुकी थीं, दोबारा फैल सकती हैं।
बच्चों के टीकाकरण के मुख्य फायदे:
- बीमारियों से बचाव:
टीके बच्चों को खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं। - हर्ड इम्यूनिटी (सामूहिक सुरक्षा):
जब अधिक लोग टीकाकरण करवाते हैं, तो समाज के कमजोर लोग जैसे नवजात शिशु, बुजुर्ग और कम इम्यूनिटी वाले लोग भी सुरक्षित रहते हैं। - बीमारियों का प्रसार कम होना:
टीकाकरण से संक्रमण फैलने की संभावना कम होती है और समाज में रोग नियंत्रण में रहता है। - बीमारियों का उन्मूलन:
टीकाकरण की वजह से चेचक पूरी तरह खत्म हो चुकी है और पोलियो के मामले दुनिया भर में बहुत कम हो गए हैं।
बच्चों का टीकाकरण शेड्यूल (Pediatric Vaccination Schedule)
टीकाकरण शेड्यूल यह बताता है कि बच्चे को किस उम्र में कौन-सा टीका लगना चाहिए, ताकि उसे सही समय पर सुरक्षा मिल सके। यह शेड्यूल WHO और CDC जैसी स्वास्थ्य संस्थाओं द्वारा तय किया जाता है।
👶 जन्म से 6 महीने तक
- हेपेटाइटिस-B (HepB):
जन्म पर पहली डोज,
1–2 महीने पर दूसरी डोज,
6–18 महीने पर तीसरी डोज - डीपीटी (DTaP – डिप्थीरिया, टेटनस, काली खांसी):
2, 4 और 6 महीने पर - हिब (Hib):
2 महीने से शुरू - पोलियो (IPV):
2 और 4 महीने पर, फिर 6–18 महीने में बूस्टर - न्यूमोकोकल (PCV13):
2, 4, 6 महीने और 12–15 महीने में बूस्टर - रोटावायरस:
2, 4 और 6 महीने पर - फ्लू (इन्फ्लुएंजा):
6 महीने की उम्र के बाद हर साल
👶 6 महीने से 18 महीने तक
- हेपेटाइटिस-B: तीसरी डोज
- DTaP: तीसरी डोज (6 महीने पर)
- Hib: 12–15 महीने में बूस्टर
- पोलियो: 6–18 महीने में डोज
- PCV13: 12–15 महीने में अंतिम डोज
- MMR (खसरा, मम्प्स, रुबेला): 12–15 महीने
- चिकनपॉक्स (Varicella): 12–15 महीने
- हेपेटाइटिस-A: 12–23 महीने में पहली डोज, 6–18 महीने बाद दूसरी
🧒 18 महीने से 6 साल तक
- DTaP: 4–6 साल में
- पोलियो: 4–6 साल में अंतिम डोज
- MMR: दूसरी डोज
- चिकनपॉक्स: दूसरी डोज
- फ्लू: हर साल
👦 किशोर अवस्था (7–18 वर्ष)
- Tdap: 11–12 साल में
- HPV वैक्सीन: 11–12 साल में (लड़के और लड़कियों दोनों के लिए)
- मेनिन्जोकोकल वैक्सीन: 11–12 साल में, 16 साल में बूस्टर
- फ्लू: हर साल
टीकों को लेकर आम गलतफहमियां
- टीके और ऑटिज़्म:
वैज्ञानिक शोधों से यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि टीकों और ऑटिज़्म के बीच कोई संबंध नहीं है। - साइड इफेक्ट:
हल्का बुखार या इंजेक्शन की जगह पर सूजन आम है, गंभीर साइड इफेक्ट बहुत ही दुर्लभ हैं। - एक साथ ज्यादा टीके:
बच्चे की इम्यून सिस्टम एक साथ कई टीकों को संभालने में सक्षम होती है। शेड्यूल पूरी तरह सुरक्षित है।
माता-पिता की भूमिका
- बच्चे के टीकाकरण रिकॉर्ड को अपडेट रखें
- किसी भी शंका पर अपने बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें
- टीकाकरण की तारीख के लिए रिमाइंडर लगाएं
- समाज में टीकाकरण के प्रति जागरूकता फैलाएं
निष्कर्ष
टीकाकरण बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। सही समय पर टीके लगवाकर न सिर्फ आप अपने बच्चे की सुरक्षा करते हैं, बल्कि पूरे समाज को भी सुरक्षित बनाते हैं।
Bachpan Hospital में बच्चों के लिए पूर्ण और सुरक्षित टीकाकरण सेवाएं उपलब्ध हैं।
आपके बच्चे का स्वास्थ्य — हमारी प्राथमिकता ❤️